आखिर किसकी थी लापरवाही ?…आखिरी वक्त में कैसे युवराज का उठ गया सिस्टम से भरोसा

नोएडा : इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला कई सवाल खड़े करता है, जिनपर हमें विचार करने की जरुरत है. क्या आज के दौर में सिस्टम पर भरोसा करना चाहिए ? हेल्पलाइन नंबर तो हैं, पर क्या हमें मदद मिलेगी ? क्या इंसानियत जिंदा है, या फिर सब वायरल होने के लिए कंटेंट है. ये सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं. क्योंकि घंटों तक युवराज बस मदद का इंतजार करता रहा. हेल्प-हेल्प चिल्लाता रहा, लेकिन मदद नहीं मिली.

मदद पहुंची…पर मिली नहीं
ऐसा नहीं था कि मदद पहुंची नहीं थी,युवराज के पिता ने 112 को कॉल करके जानकारी दी थी. दमकल विभाग की गाड़ियां आईं. NDRF की टीम भी पहुंची. लेकिन मदद करने आए मददगारों के पास सिर्फ एक रस्सी थी. अब ऐसे में बेचारे करते भी क्या. ये सोचकर भी ताचुब होता है कि जिन विभागों को हमारी मदद के लिए बनाया गया. वो उपकरण की कमी का हवाला देते हैं. माना कि उपकरण की कमी थी, लेकिन जो हिम्मत एक डिलीवरी ब्‍वॉय में थी. वो क्या ट्रेंड कर्मियों में नहीं थी ? बिना किसी उपकरण के एक डिलीवरी ब्‍वॉय पानी में कूद गया और युवराज को बचाने की पुरजोर कोशिश की. लेकिन ये हिम्मत वो कर्मी नहीं दिखा पाए, जिनके भरोसे युवराज के पिता ने हेल्पलाइन नंबर डायल किया था.

तमाशबीन जनता को चाहिए सिर्फ कंटेंट ?
जब युवराज कार की छत पर मोबाइल की रौशनी जलाकर मदद मांग रहा था, तब वहां कई लोग इक्कठा हुए. पर ये सभी तमाशबीन थे. जिन्हे एक बेबस युवक नहीं बल्कि कंटेंट दिख रहा था. जिस समाज में जीवन व्यापन करने के लिए आदमी इतनी जद्दोजहद करता. वहां अब इंसानियत नहीं व्यूज और कंटेंट की जगह है. हां मगर अब भी मोहिंदर जैसे डिलीवरी ब्‍वॉय इंसानियत को जिंदा रख रहे हैं.

युवराज की मौत का कौन जिम्मेदार ?
सड़क के अंत में न बाउंड्री वॉल थी और न ही रिफ्लेक्टर, कुछ दिन पहले भी उसी जगह पर एक ट्रक कोहरे के कारण नाले में जा घुसा था, जिसे निकाल लिया गया था. लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारों ने कोई एक्शन नहीं लिया,  सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए और एक मासूम को ये अनदेखी अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. सुबह करीब 6 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. और फिर युवराज की बॉडी को रिकवर किया गया, जिसमें एक घंटा लगा. लेकिन अगर ये रेस्क्यू ऑपरेशन सही समय पर शुरू हो जाता, तो शायद युवराज आज अपने परिवार के साथ होता. नाले के किनारे मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में युवराज लगभग 12 बजे कार के साथ गिरा था. 1 बजकर 45 मिनट तक वो मदद के लिए चिल्‍लाता रहा. लेकिन पुलिस, दमकल विभाग के मौजूद होने के बावजूद युवराज को बचाया नहीं जा सका. युवराज की मौत ने सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. मामले में SIT जांच कर रही है, वहीं एक बिल्डर को भी गिरफ्तार किया गया है. पर क्या ये जांच और कार्रवाई ही सबकुछ है. क्या इसी तरह घटना के बाद ही कोई एक्शन लिया जाएगा ?

 

by-Nikita sajwan

 

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