राजधानी देहरादून में 76 स्कूलों की पुरानी और जर्जर बिल्डिंग को जल्द ही ध्वस्त किए जाने का फैसला सरकार ने लिया है. ये वो स्कूल हैं, जिनकी इमारतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि बारिश या किसी भी बड़े हादसे के समय बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने शिक्षा विभाग से राजधानी के सभी स्कूलों की बिल्डिंग की रिपोर्ट मांगी थी. रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्कूल सालों से जर्जर हालत में थे और इनमें बच्चों का पढ़ना खतरे से खाली नहीं है. कुल मिलाकर 100 स्कूलों की जांच की गई, जिसमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक स्कूल की इमारतों को असुरक्षित पाया गया.
विभाग ने पहले ही 63 स्कूलों में पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है. यानी इन स्कूलों के बच्चों के लिए नए भवनों या अन्य सुरक्षित जगहों पर पढ़ाई का इंतजाम किया गया है. वहीं 16 स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है. जिलाधिकारी सविन बंसल ने निर्देश दिए हैं कि जल्द ही इन स्कूलों में पढ़ाई के लिए भी सुरक्षित इंतजाम किया जाए.
इसके अलावा 17 स्कूलों की इमारतें आंशिक रूप से कमजोर पाई गई हैं, इसलिए इन्हें आंशिक रूप से ध्वस्त करके सुधारने का काम किया जाएगा. इस प्रक्रिया से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और भविष्य में किसी भी हादसे की संभावना को रोका जाएगा. जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है और किसी भी हालत में कोई समझौता नहीं किया जाएगा. प्रशासन जल्द ही इन सभी स्कूलों के निर्माण और पढ़ाई के वैकल्पिक इंतजामों पर निगरानी रखेगा.