भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कुछ ऐसा हुआ जिसने दलाल स्ट्रीट को रोमांचित कर दिया। सेंसेक्स पहली बार 86,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 ने भी सितंबर 2024 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नई ऊंचाई छू ली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। बीएसई सेंसेक्स 416.67 अंक की छलांग लगाकर 86,026.18 पर पहुंच गया, जो इसका अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 27 सितंबर 2024 को सेंसेक्स ने 85,978.25 का रिकॉर्ड बनाया था। निफ्टी 101.65 अंक की बढ़त के साथ 26,306.95 पर पहुंच गया, यह इसका नया ऑल-टाइम हाई है। निफ्टी का पिछला हाई 26,277 था।
बाजार में भरोसा और विदेशी पैसा दोनों बढ़े
कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान ने कहा, “निफ्टी का ऑल-टाइम हाई पार करना बाजार के मजबूत भरोसे और स्थिर आर्थिक गति को दिखाता है। यह मील का पत्थर धैर्य, अनुशासन और डेटा से बनता है, शॉर्ट-टर्म शोर से नहीं।” 26 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹4,778 करोड़ और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹6,247 करोड़ की खरीदारी की। यह संकेत है कि बाजार में टैक्टिकल ट्रेड से डायरेक्शनल पोजिशनिंग की ओर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरती ब्याज दरें, मजबूत रुपया और बढ़ती तरलता निकट भविष्य में इक्विटी को सपोर्ट करेंगी। पीएल कैपिटल के विक्रम कसाट ने सलाह दी कि निवेशक पोर्टफोलियो को गिरती दरों के लिए तैयार करें और सरकारी बॉन्ड और रेट-सेंसिटिव सेक्टर (बैंक, NBFC, रियल एस्टेट) में निवेश बढ़ाएं।
अक्तूबर महीने में बढ़ी मांग से बाजार को होगा फायदा
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि तकनीकी और फंडामेंटल दोनों ही टेलविंड्स मौजूद हैं। अक्तूबर में दिखी कंजम्पशन बूम Q3 और Q4 FY26 में अर्निंग्स ग्रोथ में बदल सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फेड रेट कट और रूस-यूक्रेन शांति समझौते की उम्मीद ने वैश्विक इक्विटी बाजारों में सेंटीमेंट सुधारा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि वैल्यूएशन अभी भी प्रीमियम पर हैं, इसलिए तेज और स्थायी अपट्रेंड की गुंजाइश सीमित है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि जबकि वैल्यूएशन ऊंचे हैं, उभरते बाजारों के मुकाबले का गैप अब लॉन्ग-टर्म एवरेज से नीचे है। समन्वित मौद्रिक नरमी इक्विटी को स्ट्रक्चरल री-रेट कर सकती है, क्योंकि यह कैपिटल की लागत घटाएगी और रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स में रिस्क प्रीमियम को कम करेगी।
उम्मीदों के साथ सावधानी भी जरूरी
हालांकि चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग की अमृता शिंदे के अनुसार मौजूदा वोलैटिलिटी और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच ट्रेडर्स को सेलेक्टिव बाय-ऑन-डिप्स, प्रूडेंट लीवरेज मैनेजमेंट और टाइट स्टॉप-लॉस की नीति अपनानी चाहिए। फिलहाल के लिए नए लॉन्ग पोजिशन तभी लें जब निफ्टी 26,300 के ऊपर स्थिर हो। बाजार में बीते कुछ महीनों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए बड़ा सवाल है- क्या वर्तमान स्तर भारतीय बाजार का वह टर्निंग प्वाइंट है, जहां से देशी शेयर वैश्विक मंच पर अपनी धमाल मचाने वाले हैं? या निवेशकों को आने वाले कुछ महीनों में संयम बरतने की जरूरत है। अगर ब्रोकरेज हाउस सही साबित होते हैं, तो 2026 भारत के लिए सुपर साइकिल का साल हो सकता है।